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""Seeing the World Beyond Boundaries.""
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द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कोरिया दो हिस्सों में बंट गया, जिसके कारण 1950 में भीषण कोरियाई युद्ध हुआ। इसके बाद 1 अक्टूबर 1953 को अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच 'पारस्परिक रक्षा संधि' (Mutual Defense Treaty) हुई। इसी समझौते के तहत अमेरिका पिछले 75 सालों से दक्षिण कोरिया की सुरक्षा कर रहा है। आज भी उत्तर कोरिया के परमाणु खतरे और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए इस सुरक्षा की सख्त जरूरत है। इस संधि की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगर आज दक्षिण कोरिया पर कोई हमला होता है, तो अमेरिका इसे खुद पर हमला मानेगा और अपनी थल, नभ और जल सेना के साथ तुरंत जवाबी कार्रवाई करेगा।
दक्षिण कोरिया का ऐतिहासिक संबंध अमेरिका के साथ: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कोरिया…
भारत और बांग्लादेश के संबंध दक्षिण एशिया की राजनीति (South Asian Politics), सुरक्षा और आर्थिक सहयोग (Economic Cooperation) के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों (Pillars) में रहे हैं। वर्ष 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता से लेकर पिछले एक दशक तक दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, सीमा प्रबंधन (Border Management) और कनेक्टिविटी (Connectivity) में उल्लेखनीय प्रगति (Remarkable Progress) हुई है। लेकिन हाल के वर्षों में बांग्लादेश की विदेश नीति (Foreign Policy) में आए बदलाव और मोंगला पोर्ट (Mongla Port) के विकास से जुड़े नए निर्णयों ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन (Regional Power Balance) पर नई बहस छेड़ दी है।
भारत और बांग्लादेश के संबंध दक्षिण एशिया की राजनीति (South Asian Politics), सुरक्षा और…
अमेरिका (America) और ईरान (Iran) इस सप्ताह कतर (Qatar) की राजधानी दोहा (Doha) में अप्रत्यक्ष वार्ताएं (Indirect Talks) करेंगे। यह बैठक मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष (Conflict) को समाप्त करने के उद्देश्य (Objective) से हुए समझौते (Deal) पर औपचारिक हस्ताक्षर (Formal Signing) से पहले की तैयारी का हिस्सा होगी। यह जानकारी एक राजनयिक (Diplomat) ने सोमवार को दी।
अमेरिका (America) और ईरान (Iran) इस सप्ताह कतर (Qatar) की राजधानी दोहा (Doha) में अ…
कई हफ्तों (Weeks) तक रुक-रुक कर चली वार्ताओं (Negotiations) के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अंततः ईरानी शासन (Iranian Regime) के साथ युद्ध समाप्त करने पर सहमति (Agreement) हासिल करने में सफल होते दिखाई दे रहे हैं। यह वही संघर्ष (Conflict) है जिसने फरवरी (February) के अंत से पूरे क्षेत्र, विशेषकर मध्य पूर्व (Middle East), एशिया (Asia) तथा विश्व के अनेक ऊर्जा बाज़ारों (Energy Markets) को अस्थिर (Unstable) कर रखा था。
हालांकि, वास्तव में किन शर्तों (Terms and Conditions) पर सहमति बनी है, यह तब तक विवाद (Controversy) का विषय बना रह सकता है जब तक कि शुक्रवार को इस समझौते (Agreement) पर औपचारिक हस्ताक्षर (Formal Signing) नहीं हो जाते।
इज़राइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के प्रोत्साहन (Encouragement) पर, ट्रंप ने 28 फरवरी को इस युद्ध की शुरुआत इस उद्देश्य (Objective) से की थी कि ईरानी शासन को सत्ता से हटाया जाए और तेहरान (Tehran) को झुकने पर मजबूर किया जाए, जैसा कि उन्होंने पहले वेनेज़ुएला (Venezuela) के मामले में करने का प्रयास किया था。
किन्तु ईरान (Iran) की सशक्त रक्षात्मक प्रतिक्रिया (Strong Defensive Response) के सामने वे अपने इस लक्ष्य (Goal) को प्राप्त नहीं कर सके। घरेलू (Domestic) और अंतरराष्ट्रीय (International) स्तर पर बढ़ते दबाव (Pressure) के कारण ट्रंप को अंततः उपलब्ध कूटनीतिक समाधान (Diplomatic Solution) स्वीकार करना पड़ा, ताकि संघर्ष को शीघ्र (Rapidly) समाप्त किया जा सके。
वॉशिंगटन (Washington) और तेहरान (Tehran) द्वारा घोषित हालिया “समझौता ज्ञापन” (Memorandum of Understanding - MoU) इसी वास्तविकता (Reality) की पुष्टि (Confirmation) करता है。
इस समझौते के परिणामस्वरूप (As a Result) ईरान युद्ध से पहले की तुलना में अधिक सशक्त (Stronger) स्थिति में उभर सकता है। वहीं, अमेरिका का क्षेत्र में प्रभाव (Influence) और प्रभुत्व (Dominance) कमज़ोर पड़ सकता है, जबकि इज़राइल स्वयं को अपेक्षाकृत (Relatively) अधिक अलग-थलग (Isolated) महसूस कर सकता है。
यह समझौता फ़ारस की खाड़ी (Persian Gulf) के अरब देशों को भी अपनी सुरक्षा रणनीतियों (Security Strategies) और अमेरिका के साथ अपने गठबंधनों (Alliances) पर पुनर्विचार (Reconsideration) करने के लिए प्रेरित कर सकता है। साथ ही, वे ईरान को क्षेत्र की एक प्रभावशाली शक्ति (Influential Regional Power) के रूप में स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं。
ईरानी वार्ता टीम के करीबी एक स्रोत के अनुसार, अंतिम 60-दिवसीय वार्ता अवधि के दौरान ईरान की जमी हुई परिसंपत्तियों (Frozen Assets) में से 24 अरब डॉलर जारी किए जा सकते हैं。
यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह मध्य पूर्व (Middle East) की शक्ति-संतुलन व्यवस्था, वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों (Global Energy Markets) और अमेरिका-ईरान संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है。
कई हफ्तों (Weeks) तक रुक-रुक कर चली वार्ताओं (Negotiations) के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति…
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